ShodhKosh Journal of Visual and Performing Arts(2024)
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摘要
यह शोधपत्र स्वतंत्रता के बाद से भारत में चुनावी राजनीति में आए परिवर्तनों की जांच करता है, विशेष रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हाशिए पर पड़े समूहों, खासकर दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बढ़ते सहभागिता पर केंद्रित है, विशेष रूप से बिहार में। स्वतंत्रता से पूर्व चुनावी राजनीति पर उच्च वर्ग और उच्च जाति के नेताओं का प्रभुत्व था, लेकिन डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जैसी हस्तियों ने वंचित वर्गों के राजनीतिक सशक्तिकरण की वकालत की। यह लेख इस आंदोलन के विकास को दो मुख्य चरणों में विभाजित करता है: पहला, 1967 से 1990 तक, जिसमें उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे क्षेत्रों में ओबीसी और दलितों के राजनीतिक सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें कर्पूरी ठाकुर, कांशीराम और राम मनोहर लोहिया जैसी हस्तियों की प्रमुख भूमिका रही। इसमें बिहार के उस समय के राजनीतिक अस्थिरता का भी विश्लेषण किया गया है, जिसमें अग्रणी और पिछड़ी जातियों के बीच सत्ता संतुलन में बदलाव, जाति आधारित सक्रियता का उदय और धन और सत्ता का प्रभाव शामिल है।